अनुगूँज : श्री का चिट्ठा

बस ऐसे ही - कुछ मन किया तो लिख दिया।

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शनिवार, 7 जून 2025

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आज मन के कोटरों में   आज मन के कोटरों में  फिर छुपा लो प्यार को तुम  आज मन के कोटरों में  फिर छुपा लो यार को तुम आज मन के कोटरों में   कौन स...
बुधवार, 2 अक्टूबर 2024

कुछ मेरे मन की तू जाने

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कुछ मेरे मन की तू जाने कुछ तेरे मन की मैं जानूँ  कुछ मेरे आँसू तू पी ले  कुछ तेरे गम मैं पहचानूँ  मन को मन का, मन से जो मिला जीवन हर्षित कर ...
मंगलवार, 13 फ़रवरी 2024

किसी गिर रहे को उठाते-उठाते

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किसी गिर रहे को उठाते-उठाते  खुदी गिर गए हम बचाते- बचाते  किसी भूख से बिलबिलाते हुए को  किसी वक्त की मार खाते हुए को  जमाने के हाथों सताते ह...
शनिवार, 30 दिसंबर 2023

तेइस बीता आया चौबीस: यह वर्ष मंगलमय हो

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वर्ष   नूतन ,  हर्ष   नूतन ,  उग   रहा   है   सूर्य   नूतन ! साँस   नूतन ,  आस   नूतन ,  जीत   का   विश्वास   नूतन ! पत्र   नूतन ,  चित्र   ...
सोमवार, 13 नवंबर 2023

गुजर गई उम्र अब

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गुजर गई उम्र अब  अकड़ कहाँ रही अब  बाट रोटियों की ही नजर जोहती है अब कुदरती निजाम है  हर किसी का नाम है  आज तेरे साथ है  हो रही जो बात ये कल...
रविवार, 12 नवंबर 2023

धूप में जलता हुआ तन

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धूप में जलता हुआ तन प्यार में पागल हुआ मन कर रहा सौ-सौ जतन क्या भूल जाए वो सपन सपन वो जो संग दिखे थे गीत वो जो संग लिखे थे राह जिन पर संग चल...
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मेरे बारे में

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अनुगूँज
पेशे से एक आईटी कम्पनी का सी॰ई॰ओ॰ और हृदय से कवि। मूलतः उत्तरप्रदेश के चौरीचौरा क़स्बे से और सन 2000 से सिंगापुर में निवास। काम के सिलसिले में अक्सर भारत आना होता है।
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