बस ऐसे ही - कुछ मन किया तो लिख दिया।
किसी गिर रहे को उठाते-उठाते
खुदी गिर गए हम बचाते- बचाते
किसी भूख से बिलबिलाते हुए को
किसी वक्त की मार खाते हुए को
जमाने के हाथों सताते हुए को
खुदी मर गए हम बचाते खिलाते
-श्रीनारायण शुक्ल, १०-फरवरी-२०२४
आपको यह चिट्ठा कैसा लगा? लिखें।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
आपको यह चिट्ठा कैसा लगा? लिखें।